जिला-- महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
विषय - नीति के दोहे
विधा - दोहा छंद
मात - पिता सम है नहीं ,
दुनिया में भगवान।
श्राद्धा से सेवा करें ,
उनकों ईश्वर मान ।।1।।
सुख- दुख है आना सदा ,
जस धूप संग छाँव।
सत मारग ना त्यागना ,
काँटे चूभे पाँव।।2।।
देह भान राखे नही ,
आवे ना है काम ।
साँस छोड़ उड़ जात है,
रह जावत है चाम।।3।।
छाया शीतल दे सदा ,
पेड़ करे उपकार ।
मानुष राखो ध्यान में ,
लेवत ना प्रतिकार।।4।।
प्रेम करे हर जीव से ,
घृणा द्वेष का त्याग।
सुरभित जीवन हो सदा ,
करुणा रूपी बाग ।।5।।
मानष मैल न राखिए ,
उज्ज्वल हो व्यवहार ।
आपन तन उजरात है ,
उज्ज्वल कर संसार ।।6।।
मीठी वाणी से सदा ,
सरल रखो व्यवहार ।
कड़े बोल कर जात है ,
आपस में तकरार ।।7।।
क्या पाना क्या छोड़ना ,
आये खाली हाथ ।
धन संचित कर क्या करें ,
जाएं है ना साथ।।8।।
कैसे - कैसे जन यहाँ ?
डूब रहें सब रंग।
मानवता को हार ये ,
चलते राह कुसंग ।।9।।
विनम्र भाव से जो मिले,
पावत है वो मान ।
चूर - चूर हो जात है ,
मानव का अभिमान।।10।।
प्रेम नाथ से जो करें,
सो दुख नाही होत ।
जटिल मोह की पाश से,
कट जावत है शोत।।11।
पुष्पा गजपाल पीहू
महासमुंद(छ.ग.)
No comments:
Post a Comment