Thursday, October 22, 2020

महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- नीति के दोहे

नाम -- पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला--  महासमुंद
राज्य -  छत्तीसगढ़ 
विषय - नीति के दोहे
विधा  -  दोहा छंद

मात - पिता सम है नहीं , 
     दुनिया   में    भगवान।
श्राद्धा से सेवा करें , 
     उनकों   ईश्वर    मान ।।1।।

सुख- दुख  है आना सदा , 
       जस धूप    संग   छाँव।
सत  मारग ना त्यागना ,
     काँटे    चूभे      पाँव।।2।।

देह   भान  राखे  नही , 
     आवे  ना   है   काम ।
साँस छोड़ उड़ जात है,
      रह   जावत  है  चाम।।3।।

छाया  शीतल  दे सदा , 
      पेड़   करे   उपकार ।
मानुष राखो ध्यान में ,
      लेवत  ना  प्रतिकार।।4।।

प्रेम  करे   हर  जीव से , 
       घृणा  द्वेष का  त्याग।
सुरभित  जीवन  हो सदा , 
       करुणा  रूपी    बाग ।।5।।

मानष मैल न राखिए , 
        उज्ज्वल हो व्यवहार ।
आपन तन उजरात है , 
        उज्ज्वल  कर  संसार ।।6।।

मीठी   वाणी  से  सदा , 
        सरल रखो व्यवहार ।
कड़े  बोल कर जात है ,
         आपस  में  तकरार ।।7।।

क्या पाना क्या छोड़ना , 
         आये    खाली    हाथ ।
धन संचित कर क्या करें , 
         जाएं  है  ना   साथ।।8।।

कैसे - कैसे  जन  यहाँ ? 
         डूब  रहें   सब  रंग।
मानवता  को  हार ये ,
         चलते   राह  कुसंग ।।9।।

विनम्र भाव  से जो मिले,
          पावत  है  वो मान ।
चूर - चूर हो जात है ,
          मानव का अभिमान।।10।।

प्रेम   नाथ  से  जो  करें, 
         सो  दुख  नाही  होत ।
जटिल मोह की पाश से,
         कट  जावत  है  शोत।।11।

पुष्पा गजपाल पीहू
महासमुंद(छ.ग.)

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