Thursday, October 22, 2020

महासमुन्द से संतोष गुप्ता की कविता

रचनाकार का नाम - संतोष गुप्ता
राज्य - छत्तीसगढ़ जिला महासमुन्द
विधा - कविता 



माँ क्या तुमसे एक ...
   

माँ क्या तुमसे 
  मैं एक सवाल कर लूँ ।
हूँ बेटा तुम्हारा 
    तुमसे आज झगड़ लूँ ।

तुम जयंती , तुम  हो दुर्गा
     तुम ही हो शक्ति हर ।
फिर क्यों है कोरोना कहर 
 नवरात्र में सुना है शहर गाँव हर ।

माँ क्या तुमसे एक ...


  हर तरफ खामोशी सा है 
       रास , गरबा , डांडिया बंद ।
मांदर थाप में नाचते भक्त है शांत
   जस गीतों के क्यों  गुम है छंद ।

माँ  क्या तुमसे  एक ...

      तुमने तो बड़े बड़े दुराचारियों
        को हमेशा मार गिराया है ।
  तुम्हारे रहते फिर कोरोना ने
      क्यों हाहाकार मचाया है ।

माँ  क्या तुमसे एक ...

   मंदिरों  में श्रद्धालुओं की संख्या
  सीमित , कष्ट असीमित हो गई है 
   है तू शक्तिशाली फिर सेवक तेरे
कोरोना से भयभीत हो गई है ।

माँ  क्या तुमसे एक ...

      माँ तू सुन मेरी  एक बात 
    बन जा चंद्रघंटा से काली ।
       नष्ट कर दुनियाँ से कोरोना 
खुश होकर भक्त बजाये ताली ।

माँ  क्या तुमसे एक ...
            
     हर तरफ हँसी , खुशी 
विद्यार्थियों को स्कूल दे दे ।
लॉक डाउन से हुये बेरोजगारों को
     भरपूर रोजगार तू दे दे ।

    माँ  क्या तुमसे एक ...

मंदिर , बाग बगीचों , में
    भक्त तेरे निर्भीक जा सकें ।
अपनों से अपने गले मिले
छोटे ,बड़ो का  श्रद्धा सेपैर छू सकें 

    माँ  क्या तुमसे एक ...


संतोष गुप्ता  पिथौरा

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