जिला-राजनांदगांव
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-"पंछियों का जीवन"
विधा-कविता
नील गगन में उड़ते पंछी,
वृक्षों पर सो जाते है।
चहक-चहक कर, फुदक- फुदक कर,
मीठा गीत सुनाते है।।
घूमते है ,वन उपवन में
निशि-दिन क्रीड़ा करते जंगल में।
पीते नदी झील का पानी,
करते हैं वन में मनमानी।।
मनोरंजन व स्वार्थ में मानव,
पशु-पक्षियों को पालते है।
विवशतावश बन्धन में बन्ध जाते,
मन से स्वच्छन्द जीना चाहते है।।
सो नही पाते ,खा नही पाते,
मन उदास ,बंदी बन जाते।
हृदय में है तड़प का तपन,
जब से मिला पिंजरे का जीवन।।
(पशु -पक्षियों से प्रेम करे,वे भी हमारे पर्यावरण का अभिन्न अंग है।)
रचनाकार
महदीप जंघेल
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