जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
शीर्षक- भारत की सरज़मीं
विधा - गज़ल (बे बहर)
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शेर बैठे है यहाँ कोई गधों की जमात थोड़ी हैं,
देश को दहलाये अब किसी की औकात थोड़ी हैं।
मोहब्बत हैं जी जान से हमें भारत माँ तुझसे,
ये खाली कोई दिखावे की जज़्बात थोड़ी हैं।
कब तक बाँटते रहेंगे हम अपने मातृभूमि को,
ये भारत की सरज़मीं हैं, कोई खैरात थोड़ी हैं।
जब चाहे तब आ जाते हैं हंगामा करने चौराहे पर,
ये सड़क हैं, किसी के बाप की बिसात थोड़ी हैं।
ये चिल्लाते है, बरगलाते है, इन्हें मिमियाने दो
सब पुराना तमाशा हैं,कोई आज की बात थोड़ी हैं
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~ गावस्कर कौशिक
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