रचनाकार - संतराम कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - " प्राचीन धरोहर "
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प्राचीन धरोहर संपत्ति हमारी,
इतिहास की ये निशानी है।
पत्थर की मूर्ति, मकबरा, इमारत,
कहते इनकी कहानी है।।
वैभव है, हमारी शान है।
प्राचीन सभ्यता की ये पहचान है।
जीवन्त-सा ये कलाकृति हमारी,
करते हरदम गुणगान हैं।।
सैलानियों का भीड़ उमड़ता,
करने इनके दीदार को।
ताजमहल हो या कुतुबमीनार,
या परमारकालीन दीवार को।।
प्राचीन धरोहर से परिपूर्ण,
छत्तीसगढ़ की धरती है।
इतिहास की मधुर कहानी,
बयां सब ये करती है।।
बारसूर का मामा-भांजा मंदिर,
गणेश जी की जुड़वा प्रतिमा है।
अनोखा,अद्भुत,शानदार,कलाकृति,
सुन्दरता की जिसकी न कोई सीमा है।।
कबीरधाम का भोरमदेव मंदिर,
छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहलाता है।
लक्ष्मण मंदिर सिरपुर का,
बेजोड़ नमूना का खिताब पाता है।।
राजिम का राजीव लोचन मंदिर,
तीन नदियों का जहाँ संगम है।
छत्तीसगढ़ का कुंभ कहलाता,
तरंगिनी का दृश्य बहुत विहंगम है।।
शबरी का स्थान कहलाता,
शिवरीनारायण तीर्थ धाम है।
लक्ष्मण सह पधारे पुरुषोत्तम,
जूठे बेर खाये प्रभु श्रीराम हैं।।
चन्द्रपुर की माँ चन्द्रसेनी,
नाथलदाई की महिमा महान है।
भक्तगणों की भक्ति झलकती,
महानदी में करते स्नान हैं।।
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मौलिक रचना (स्वरचित)
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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