स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- आलेख
शीर्षक -"समाचार पत्र "
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समाचार का कागज में छपा स्वरूप ही समाचार पत्र कहलाता है ।जो हर घर के दरवाजे तक विभिन्न समाचार का संदेशवाहक होता है ।समाचार पत्र प्रतिदिन सुबह आता है और इसे पढ़कर काफी जानकारियां प्राप्त होती है ।
इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो समाचार भेजने की प्रथा का चलन बहुत पुराना है । संदेशवाहक के माध्यम से समाचार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था और विस्तृत रूप से आवाम को समाचार देने की बात ढोल नगाड़े से मुनादी करके दी जाती थी। समाचार पत्र का इतिहास भारत में देखें तो अंग्रेजों के आने से पहले तक इसका कोई निशान नहीं प्राप्त होता है ।भारत में अंग्रेजों ने ही समाचार पत्रों का विकास किया । 1780 में भारत का सबसे प्रथम समाचार पत्र कोलकाता में प्रकाशित हुआ था ,जिसका नाम "दी बंगाल गजट" था। आज वर्तमान समय में भारत में कई प्रकार के समाचार पत्र कई भाषाओं में प्रकाशित हो रहे हैं ।
समाचार पत्र बहुत ही शक्तिशाली माध्यम है जो समाज के एक-एक व्यक्ति तक पहुंच कर उसके विचारों को प्रभावित करता है । यह व्यक्ति को समाज ही नहीं पूरे संसार से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। यह ज्ञान को विस्तारित करने एवं सूचना प्राप्त करने का सटीक स्रोत है।
समाचार पत्रों की एक खासियत यह भी है कि इसकी लागत कम होने से इस तक समाज का हर आदमी पहुंच बना सकता है ।केवल किसी समाचार पत्र के संगठन से संपर्क करने की देरी मात्र होती है। आजकल रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर भी डेढ़ से ₹2 में समाचार पत्र लेकर पढ़ सकते हैं यदि हम किसी यात्रा पर हो तब भी।
वर्तमान समय में यदि संसार के किसी भी कोने में कोई भी घटना घटित हो तो उसके अगले दिन हमारे पास उसकी खबर आ जाती है ,और यही कारण है कि चाय के टेबल में हर वह शख्स समाचार पत्र का इंतजार करता दिखता है जिसे वर्तमान समय से जुड़ने का शौक रखता हो।
समाचार पत्र ब्यापार ,राजनीति,सामाजिक मुद्दों बेरोजगारों, खेल, शिक्षा ,विज्ञान, दवाई, मेलों ,त्योहारों और तकनीकी जागरूकता का ही ज्ञान नही देता बल्कि साथ ही साथ हमारे ज्ञान को विस्तारित कर हमें एक अच्छा नागरिक बनने में मदद भी करता है । अतः नियमित समाचार पत्र पढ़ना चाहिए और दूसरों को भी पढ़ने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।
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