जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - समाचार पत्र
विधा - आलेख
शीर्षक - समाचार पत्र का वर्तमान स्वरूप
********************************
//समाचार पत्र का वर्तमान स्वरूप//
समाचार पत्र आज की सामाजिक व राष्ट्रीय आवश्यकता है । यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और व्यवहारिक जीवन की नींव है । यदि कहा जाय कि समाचार पत्र के बिना आधुनिक जीवन - शैली अधूरी है , तो कोई गलत नहीं होगा । हमारी दिनचर्या ही समाचार पत्र से शुरू होती है । सबेरे - सबेरे चाय के साथ अखबार या समाचार पत्र का अवलोकन शिक्षित व हाई प्रोफाइल लोगों की पहचान हो गई है । देश - दुनिया की कोई खबरें न छूट जाए , इस बात का सभी लोग विशेष ध्यान रखते हैं ।
समाचार पत्र प्राचीन काल से ही संदेश वाहक का कार्य करता आ रहा है , भले ही उसका स्वरूप कैसा भी हो । चूँकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है , अतः समाज के प्रत्येक घटना का उस पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता ही है । आज के वैज्ञानिक युग मे तो समाचार पत्र की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है । प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनो प्रकार के खबरिया माध्यम सामान भूमिका निभा रहे हैं । इसीलिए कहा जाता है कि कर लो दुनिया मुठ्ठी में । किसी भी कोने में कोई घटना घटती है तो तत्काल उसी क्षण हमको सूचना मिल जाती है । आज सूचना - तंत्र इतना मजबूत और सुविकसित हो गया है ।
अब तो मोबाइल , कंप्यूटर , रेडियो , टी. वी. आदि के माध्यम से भी समाचार की त्वरित जानकारी प्राप्त हो जाती है । आजकल के युवा वर्ग फेसबुक , व्हाट्सएप , ट्विटर , यूट्यूब आदि का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे हैं । इन सबमें दुनिया भर की जानकारी व सूचनाएँ सेकंडों में मिल जाती है । फिर भी समाचार पत्र का महत्व कम नहीं हुआ है । समाज का एक बड़ा वर्ग उसे प्रतिदिन चाव से पढ़ता है । समाचार पत्र के व्यवसाय से कई लोगों को रोजगार मिल जाता है ।
नव भारत , देशबन्धु , दैनिक भास्कर , हरिभूमि , नवभारत टाइम्स , क्रॉनिकल जैसे अनेक नाम के हिन्दी व अंग्रेजी अखबार रोज घर - घर मे बाँटी जाती है । ये समाचार पत्र समाज की समस्याओं को मुद्दा बनाकर सरकार के सामने उजागर करती है और समाज व सरकार को सही दिशा भी प्रदान करती है ।
किन्तु वर्तमान मे समाचार पत्र की भूमिका नकारात्मक ज्यादा हो गया है । यथार्थ व पारदर्शिता के नाम पर बलात्कार , हत्या , भ्रष्टाचार और अश्लीलता से भरे समाचार को बढ़ा - चढ़ाकर परोसा जा रहा है । इस कारण समाज मे चरित्रहीनता , लूटपाट , नशाखोरी आदि बुराइयाँ फैल रही है । नैतिकता , संस्कार , मर्यादा , सत्संग आदि की उपयोगी व सकारात्मक बातें किसी कोने में नाम मात्र को छापी जाती है । कभी - कभी तो ऐसी ज्ञानवर्धक पठनीय जानकारी खोजने पर भी नहीं मिलता । इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जनता , समाज , देश व सरकार की भलाई से किसी को कोई मतलब नहीं है बल्कि स्वार्थ व पैसा ही सर्वस्व हो गया है ।
अतः समाचार पत्र को अपना उज्ज्वल एवं स्वच्छ छबि कायम रखकर देश व समाज के हितार्थ कार्य करना अनिवार्य है । ' सबका मंगल , सबका भला ' - समाचार पत्र का उद्देश्य व सिद्धांत होना चाहिए ।
---#---#---#---
No comments:
Post a Comment