निवासी-बैरन-बाज़ार,रायपुर ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय:-"शांति/अहिंसा/महात्मा गांधी
विधा-छ्न्द-मुक्त,कविता ।
अलंकार-कारणमाला अलंकार ।
शीर्षक:-"अहिंसा के पुजारी " ।
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|||""अहिंसा के पुजारी """||||
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देश के राष्ट्रपिता कहलाये---
अहिंसा के पुजारी बन,
देश को,आजाद कराया ।
सत्याग्रह से,सच का--
विरोध करने का,पाठ पढ़ाया ।
और अहिंसा से---
शांति और धैर्यता को सीखाया ।
गाँधीजी के तीन बन्दर---
से सबक मिला सीखने,
बुरा मत देखो,बुरा मत सुनो,
और बुरा मत बोलो ।
देश की,गरीबी-लाचारी व भूखमरी,
ने,उनके ह्रदय को झकझोर दिया,
और प्रण किया कि---
तन ढँकने,कम कपड़े,
और सप्ताह में, एक दिन व्रत किया ।
दैनिक जीवन -स्व-स्वच्छता की बातें,
हम-सबको,सीखा दी,सफाई की बातें।
असहयोग आंदोलन ,किये देश हित में,
पर,विरोधियों को भी,झुका दिया ।
भजन-कीर्तन व गीता पाठ से---
सबका मन में निच्छलता जगाया ।
मरते-मरते भी-हत्यारे को,माफ किया,
अन्तिम क्षणों में,हे!राम उद्घोष किया ।
बापूजी के आदर्श ने---
अखिल विश्व में,सत्य-अहिंसा,
शब्द की ताकत का महत्व बताया ।
उनके कारनामे व सद-विचार---
सदा अजर-अमर रहेंगे ।
आओ मिलकर उन्हें---
हम-सब सच्ची श्रद्धांजलि दे दें --।
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व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि महात्मा गांधी जी तो "सत्य-अहिंसा और सद्गुणों,सादगीपूर्ण जीवन के मिसाल हैं ।
===स्वरचित-प्रस्तुति-एच-एस-अरमो
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