Thursday, October 1, 2020

नलिनी बाजपेयी की रचना- सत्य

रचनाकारा- नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर, (छ. ग.)
     विषय-गाँधी/अहिंसा/शांति
     ( कारण माला अलंकार का 
    प्रयोग)

         *सत्य -अहिंसा और गाँधी*

सत्य, अहिंसा जे 
        पथ पर चलकर,
बापू उभरे  विश्व मंच 
      पर नेता बनकर।

सत्य, अहिंसा रूपी 
       अस्त्र से करते थे प्रहार,
जीवनभर स्वदेशी 
      अपनाने करते रहे प्रचार।

गाँधी बनकर आएं थे
      फिरंगियों के लिये आँधी,
सत्याग्रह,सविनय आंदोलनों 
      से जग में फैला विचार 
गाँधी वादी।

स्तय,अहिंसा थे बड़े 
         हथियार, जिनसे जीता गुलामी का अंधकार,
      गुलामी मिटाने के लिए,
बापू थे अद्भुत अवतार।

स्वदेशी आंदोलन से देश
         जा बढ़ाया व्यापार,
आत्मनिर्भर हो जनता 
        हर्षित हुई अपार।

शांति के पुजारी ने खोल
        दिए विश्व शांति के द्वार,
शांति, अहिंसा, विकास, 
   उल्लास से सूखी हुआ घर-द्वार।

*कारण माला अलंकार का प्रयोग*-
1.सत्य, अहिंसा के पथ पर चल,बापू उभरे  विश्व मंच पर नेता बनकर।
2.सत्य, अहिंसा थे बड़े हथियार, जिनसे जीता गुलामी का अंधकार।
3.स्वदेशी अपनाकर  देश का बढ़ाया व्यापार।
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    नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर, (छ .ग.)

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