पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
अलंकार :- कारण माला अलंकार
गांधी की भारत यात्रा...
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा,
गांधी आये भारत महान ।
देख यहां की दीन दशा,
रह गए वह हैरान ।
कहने लगे क्या यह वही देश है, जिसके लिए दी हमने जान ।
न भाईचारा है न अहिंसा
यहां तो घर घर में होती है हिंसा,
बेटे ही यहां परिवार का कर रहे हैं हिस्सा हिस्सा l
बैठ गया जी उनका सहसा
हो गए वो निस्तब्ध ,सुनसान
स्वर्ग से लेकर भ्रमण कीअभिलाषा,
गांधी आए भारत महान ।
पूंजीपतियों का बोल बाला
गरीबों का है मुंह काला
राजनीति के नाम पर नेता ,
कर रहे हैं घोटाला,
करे काम जो नेकी का
निकल रहा उनका दिवाला
पैसे के आगे सब कुछ फिका
ना कोई जीजा ना कोई साला
हैरत में गांधी जी जल रहा उनका जी जान
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा ,
गांधी आए भारत महान ।
भ्रष्टाचार की छत्रछाया में,
बस पैसे की मोह माया में,
आधुनिकता की गोरी काया में
करके भेद अपने पराया में,
भूल के अपने पूर्वजों का बलिदान,
मस्त मगन अपने जीवन में है इंसान,
देख रहे हैं दलदल ऐसा जहां से निकलना नहीं आसान,
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा ,
गांधी आए भारत महान l
आतंकवाद की आग ने,
विकास के बेसुरे राग ने
ना रहा कोई प्रेम अनुराग में,
स्वतंत्र नाम का देश हमारा,
डस दिया इसे नशाखोरी के नाग ने ।
कर दिया चूर मां का सम्मान,
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा ,
गांधी आए भारत महान ,
धर्म के ठेकेदारों ने
न्याय के पहरेदारों ने
देश के इज्ज़तदारों ने
बेच दिया अपना ईमान
सोच रहे हैं गांधी जी,
कैसे लौटाऊ मां का सम्मान ।
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा ,
गांधी आए भारत महान ,
देख रहे हैं गांधी जी बैठे हैं सोच में
कैसे मन से निकाल के
छाप दिया मुझे नोट में l
मैं तो अहिंसावादी पैसा हिंसा का जड़ है ,
इसी पैसे के कारण समाज रहा लड़ है
मत पूजो मुझे तुम मूरत में राष्ट्रीय त्योहारों में ,
मैं अमर हो जाऊंगा भर लो अपने विचारो में l
सार्थक करो अपने पूर्वजों का बलिदान l
स्वर्ग से लेकर भ्रमण की अभिलाषा गाँधी आये भारत महान
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