Monday, October 12, 2020

जांजगीर-चांपा से संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- जवान

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- गीत
शीर्षक- जागो रे जवान

        जागो रे जवान 

चहक रही हैं चिड़ियाँ, हो गया विहान।
कब तलक सोयेगा, उठ जागो रे जवान।।

धरती तुम्हें करे पुकार, आकाश दे आवाज ,
भारत माँ के वीर सुपूत, तुम पर सबको नाज ,
लड़ने को तैयार खड़ा है शत्रु बंदूक तान।
कब तलक सोयेगा, उठ जागो रे जवान ।।

सुख, शांति, समृद्धि का न हो कोई भक्षक ,
एकता, अखण्डता का तुम हो संरक्षक ,
घुसे न शत्रु देश में रखना है इसका ध्यान ।
कब तलक सोयेगा, उठ जागो रे जवान ।।

छिने न कोई आजादी, फिर न हों गुलाम,
आतंक-अत्याचार का करना है काम-तमाम,
तुम्हीं पर टिकी हुई भारत देश की शान।
कब तलक सोयेगा, उठ जागो रे जवान ।।

सूरज चढ़ा आकाश में लालीमा हुई दूर ,
जगा रही है हवा भी होकर के मजबूर ,
मिट न जाये तेरी सब बनी हुई पहचान।
कब तलक सोयेगा, उठ जागो रे जवान ।।

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