जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-पक्षी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
पक्षी तुम्हारा उन्मुक्त गगन
में उड़ान,
रंग-बिरंगे पंख,पैनी निगाह,
नुकीले चोंच,
बयां कर जाती तुम्हारा हौसला और विश्वास ।
अपने बच्चों के लिए ममत्व भरा
घोसला,
चहचहाहट चीं -ची कर आंगन में
मधुर गान,
घंटों आईने में अपने आपको निहारना।
खुशियों से भर जाता है उदास होता मन,
मानव कभी तुम्हारा पंख कुतरता
खुश होता,
कभी मारकर खा जाता शिकारी
बनकर।
अब तो पहाड़ी मैना भी कैद हो गई पिंजरे में,
अपनी बोली भुल गुडमार्निंग कह
विवश है,
काश कि तुम उड़ान भर पाते बेखौफ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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