महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"जग कल्याणी"
विधा-भजन
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भवतारिणी दुखहारिणी सुखकारिणी,
शेरोंवाली जग जननी जग कल्याणी।
भवतारिणी......
जग सृष्टा जग का पाप हरो,
अत्याचार दंभ का नाश करो
धरणी पर व्यापै ख़ल कामी,
संहारो सिंह सवारी अंतर्यामी।।
दुख मोचिनी प्रभंजनी महिसासुर मर्दिनी,
भवतारिणी.......
त्रयंबिका महागौरी महामाया,
त्रिभुवन में कर दो मातृछाया।
शंभुप्रिया शैलजा अष्टभुजया,
त्रिपुरसुंदरी मोहिनी मैना तनया।।
रणचंडी रक्तांबरा कालरात्रि कटार धारिणी,
भवतारिणी........
चंद्रघंटा चंचला तुम चंडिका,
महाकाली शैलपुत्री शिवालिका।
ममतामयी माता वनिता स्वर्णा,
शत्रुदमना कामाख्या कंचनवर्णा।।
अकूत आशीष आँचल भरणी मनोहारिणी,
भवतारिणी दुखहारिणी सुखकारिणी।
शेरोंवाली जग जननी जग कल्याणी।।
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