Saturday, October 10, 2020

संतराम कुम्हार की रचना- भ्रूण हत्या

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " भ्रूण हत्या "
----------------------------------

कैसी विडंबना है देश की,
जहाँ औरतें मर्दों से कम आँकी जाती है। 
जगत जननी माताओं को, 
जगत में आने से पहले ही जाँची जाती है।। 

अंकुश कब लगेगा, 
भ्रूण हत्या जैसे महापाप पर।
समाज कुरीति मुक्त हो अपना, 
लड़की बोझ न हो एक बाप पर।। 

चहकने वाली थी एक प्यारी आवाज, 
परिवार में परी की भव्य आगाज। 
गोद भर जाती इस नन्ही -सी जान से, 
ख़त्म किया जिसे मौत के फ़रमान से।। 

बेटी ही नहीं रही तो बहू कहाँ से लाओगे।
माँ के इस दर्द को, न जाने कब समझ पाओगे। 
माँ की ममता हुई लहू-लूहान,
उसकी सहादत को मेरा सादर प्रणाम।। 

बहुत हो गया दुव्र्यवहार,
बहुत हुई अब अत्याचार। 
समस्या बहुत गंभीर है, 
इस पर करें जरूर विचार।। 
                                                                               
--------****----------

मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...