Saturday, October 10, 2020

गजेन्द्र हरिहारनो "दीप" कृत लेख- नारी अबला नहीं, सबला है।

रचनाकार :- गजेन्द्र हरिहारनो "दीप
  डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़)
विषय :- नारी अबला नहीं सबला है
विधा  :- गद्य 
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स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कहा गया प्रसिद्ध वाक्य  " लोगों को जगाने के लिए महिलाओं को जागृत होना ज़रूरी है । एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है ,तो परिवार आगे बढ़ता है , गाँव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है । " निःसंदेह नारी शक्ति को उद्घाटित करता है । नारी  अबला नहीं सबला है इस बात को वर्तमान में नारियों ने चरितार्थ कर दिखाया है ।
      नारी के महत्व को रेखांकित करता हुआ यह वेद वाक्य  " यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवताः " अपने आप में सब कुछ उद्घोष करता है ।
       स्त्री ही सृजन की शक्ति है , सृजन का मूल स्रोत है । स्त्री से ही मानव जाति का अस्तित्व कायम रह सकता है ।
     बदलते समय के साथ आधुनिक युग की नारी पढ़ लिख कर स्वतंत्र है । वह अपने अधिकारों के प्रति सजग है तथा स्वयं अपना निर्णय लेती हैं । अब वह घर की चारदीवारी से बाहर निकल कर देश के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण कार्य कर रही है । ऐसे ही नारी शक्ति की एक मिसाल बनी सहारनपुर की अतिया साबरी । अतिया पहली ऐसी मुस्लिम महिला है जिसने तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ को बुलंद किया । तेज़ाब पीड़ितों के ख़िलाफ़ इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाली वर्षा जवलगेकर के भी क़दम को रोकने की नाक़ाम कोशिश की गई लेकिन उसने इंसाफ़ की लड़ाई लड़ना नहीं छोड़ा ।
         आज महिलाएँ जागरूक हो चुकी हैं। आज की महिला ने उस सोच को बदल दिया है कि वह घर और परिवार की ही ज़िम्मेदारी को बेहतर निभा सकती है । 
    आज की महिला पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर बड़े से बड़े कार्य क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं । फिर चाहे काम मज़दूरी का हो या अंतरिक्ष में जाने का । महिलाएँ अपनी योग्यता हर क्षेत्र में साबित कर रही हैं ।
   " नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों और कड़ियों को तोड़ने लगेगी तो विश्व की कोई शक्ति उसे रोक नहीं पायेगी । "
  चाहे जो भी बन जाओ, गर्व से नारी ही कहलाओगी
चाहे युग कोई सा आये, तुम ही जगत जननी कहलाओगी
दुनिया के इस कठिन मंच पर,एक प्रदर्शन तुम भी दिखलाओ 
कठपुतली नहीं किसी खेल की, अब स्वतंत्र मंचन कर परचम लहराओ 
     अब नारी को अबला मानने के भ्रमजाल से हमें अपने आपको निकालना होगा ।
सदियों से महान हो तुम, सदैव सर्वोच्च ही बनी रहो 
अबला नहीं हो तुम नारी , इस बात का अभिमान करो 
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गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
डोंगरगाँव जिला-राजनांदगाँव ( छत्तीसगढ़)
( सर्वथा मौलिक सृजन )

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