Tuesday, October 6, 2020

पुष्पा पटनायक की रचना- प्रभु-मोह

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (तदगुण अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"प्रभु-मोह"
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मोह  माया  में   पड़कर 
लोग   बर्बाद    होते   हैं 
जो  मोह  प्रभु  से करते 
तो  बैकुंठ  धाम में होते

धन का करते मोह कभी
और कभी  तन का  मोह 
संसार  मोह   की  नगरी 
रे मनवा खुदका  ले टोह

युग- युगांतर  से भटकते 
मायाजाल में क्यों फ़ंसते 
अब  छोड़ ये सब  चलन 
चल रे  मन  प्रभु  मिलन 

जब  से  प्रभु मोह  लगा 
प्रभु चरण के निकट आ 
तब  से  मोहित  मन को 
अपार सुख मिलने लगा

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