जिला :- महासमुंद
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- माँ धरती के दोहे
#######################
धरती जीवन दायिनी, बरसाती नित नेह।
कहीं थार सी मरू भू, कहीं बर्फ की लेह।।१।।
कई रंग व रूप लिए, है रत्नों की खान।
लालन - पालन जो करे, कैसे करें बखान।।२।।
अन्न उगाती है धरा, निज छाती को चीर।
ममता की मूरत बनी, धरे धरा नित धीर।।३।।
मनुज पेड़ ना काटिए, धरती करे पुकार।
मैया कहती पूत से, तरुवर हैं श्रृंगार।।४।।
धरती अपनी पूत से, करती नित ही प्यार।
जितनी सेवा देत जो, दे उतना उपहार।।५।।
#######################
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने धरती माँ के गुण का बखान किया है।
No comments:
Post a Comment