रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-मुक्तक
शीर्षक- नारी प्रताड़ना
उन सूजी आंखों के पीछे कौन है?
क्यूँ नारी प्रताड़ना पे ये समाज मौन है?
वो लड़की जब बैठी मेरे सामने
उसकी बोझिल नज़रों में कई सवाल थे
उसके घोर रुदन और विलाप के साक्षी
उसके लाल हो आये दो नैन थे
उसके मौन सवालों के जवाब
ढूंढ रही मैं कई रातों से
सुलझाना चाहती हूं पर
उलझ रही उसकी अनकही बातों पे
क्या कसूर था उसका नारी होना या
पुरुषप्रधान समाज मे सर उठा के जीना?
प्रताड़ना की इस विभीषिका में नारी बैचेन है
न्याय की गुहार पर भी खो रही यकीन है
उन सूजी आंखों के पीछे कौन है?
क्यूँ नारी प्रताड़ना पे ये समाज मौन है?
No comments:
Post a Comment