Tuesday, October 20, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- भाव

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
  विषय-भाव,

                भाव

हे ईश!हमारे मन 
      में सुंदर भाव देना,
जीवन में ना कोई 
       हमें अभाव  देना।

रहे मन में भाव 
       मातृभूमि की रक्षा का,
मानव-मानव में प्रेम 
         भाव समता का।

राष्ट्र निर्माण संग
       संस्कार पोषित हो,
इस धरा में कोई 
      भी पीड़ित,शोषित न हो।

आन-बान शान और
        देश प्रेम का भाव रहे,
हर साँसों के आने जाने संग
      जय हिंद का भाव रहे।

चल सकूँ जीवन में
     सच्चे मार्ग पर ऐसा भाव रहे,
कहीं भटके ना जीवन के
       किसी मोड़ पर,मन में सेवाभाव रहे।

मुसीबतों से लड़ जाएं,
         सम्मान बचाएं,
बड़ों का आशीष लेकर 
       अहंकार को दूर भगाएं।

*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में मन में सुंदर भाव के साथ मातृभूमि की रक्षा,मानव -मानव में समता के भाव ,राष्ट्र निर्माण संग सुंदर संस्कार की कामना की गई है।हर मुसीबतों से लड़ने और सम्मान बचा अहंकार दूर करने की कामना की गई है।
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      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)

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