स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता (परिसंख्या अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"जीवन "
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रहस्य जीवन अदभूत अद्वितीय
अदभूत इसके क्रियाकलाप
कभी माया कभी काया से
बंध निरन्तर चलता जाए
जग में जीवन जीना है जो
तो हर संताप सहता जाए
चाहे दुख हो चाहे सुख
चक्र की गति से बढ़ता जाए
काम यदि कर लिए हो बड़े
तो संसार में पहचान बने
वरना समझ कोई फर्क नहीं
कीड़ों की तरह मरना पड़े।
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