जिला एवं राज्य:-रायबरेली, उत्तर प्रदेश
शीर्षक:-मन की व्यथा
विधा:-कविता
मन की व्यथा कहूँ किसको
यह निज कर्मों का फल होगा
फिर भी उम्मीद यही है कि
जो आज हुआ कल ना होगा
जीवन में विघ्न बहुत आए
लेकिन आ आ कर चले गए
कुछ कर्म किए होंगे अच्छे
जो सही वक्त पर संभल गए
पर पता नहीं था ये मुझको
मेरा परिश्रम भी विफल होगा
फिर भी उम्मीद यही है कि
जो आज हुआ कल ना होगा
कहते हैं कर्मों का प्रतिफल
जीवन में ही मिल जाता है
तेरा किया हुआ पिछला
सब आगे ही आ जाता है
जो आज हुआ तेरे सम्मुख
तूने भी कभी किया होगा
फिर भी उम्मीद यही है कि
जो आज हुआ कल ना होगा
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