अकलतरा जांजगीर चांपा
छत्तीसगढ़
विषय
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**तुम ही तुम*
मेरी यादों में तुम ही तुम
मेरी बातों में तुम ही तुम
तुम्हें कैसे बताऊं मैं
मेरी सांसों में तुम ही तुम।
मेरे दिनमान तुम ही तुम
मेरे अरमान तुम ही तुम
तुम्हे कैसे बताऊं मैं
मेरे दिलजान तुम्हीं तुम।
मेरी नींदों में तुम ही तुम
मेरे ख्वाबों में तुम ही तुम
तुम्हें कैसे बताऊं मैं
सुबह ओ शाम तुम्हीं तुम।
मेरी हर सांस तुम ही तुम
मेरा हर गीत तुम ही तुम
तुम्हें कैसे बताऊं मैं
मेरा संगीत तुम्हीं तुम।
मेरा श्रृंगार तुम्हीं ही तुम
मेरा ये रूप तुम्हीं तुम
तुम्हें कैसे बताऊं मैं
छाव और धूप तुम ही तुम।
मेरा जीवन भी तुम ही तुम
मेरा तन मन भी तुम ही तुम
जिसे मैं देख के निखरूं
मेरा दर्पण भी तुम ही तुम।
रंजना मखीजा
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