रचनाकार- सिध्देश्र्वर साहु
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- जड़कल्ला(ठंड)
#जड़़कल्ला
पुन्नी के चंदा ह देख कईसे लजावत हे ,
कातिक ले बिसर के अगहन ह आवत हे।।
बिहनिया ले उठे मंगलू दांत किटकिटावत हे,
धुंधरा संग पुरवईय्या, जाड़ ह जनावत हे।।
रऊनईया में बईठे बबा गोरसी ल सुलगावत हे,
रंधनी म बईठे दाई फरा संग उसनावत हे।।
सुरुज-नरायण अटियावत बेरा में उगासत हे ,
कुकरा घलो पोहाती जड़जड़ावत बासत हे।।
पूस के महिना लें अब फागुन तिरयावत हे,
होरी के गुलाल असन बासंती छावत हे ||
-सिध्देश्वर साहु
(जिला- महासमुंद)
Friday, October 16, 2020
छत्तीसगढ़ से सिध्देश्वर साहु की रचना- जड़कल्ला
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