जिला :- महासमुन्द
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- कोरोना में आराधना
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देवतुल्य परिचारिका, करे सदा उपचार।
सेवा भाव से उनके, मिला जनम उपहार।।१।।
स्वस्थ काया है अपना, बस उनका ही हाथ।
देखभाल करते सदा, रहते हरदम साथ।।२।।
हर पीड़ा का जो रखे, राम - बाण ईलाज।
सारा जग पूजे उन्हें, हर उर में है राज।।३।।
जग भर से आगे खड़े, हैं दुर्गा के रूप।
ममता की बरसा करें, बने नेह की कूप।।४।।
कोरोना मर्दन करें, संकट में है प्राण।
मैया निज आशीष से, करो हमारी त्राण।।५।।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने वर्तमान परिदृश्य में डाक्टरों एवं परिचारिका गण को माँ दुर्गा स्वरूपा मानकर उनकी आराधना की है। साथ ही माँ अम्बे से यह प्रार्थना की है कि "हे माँ इस महामारी से हमारी रक्षा करो।"
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