स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता(एकावली अलंकार)
शीर्षक -"चन्द्र"
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चंदा चंद्र-सी लगे पयोधर में
पय समान अमृतमय में जग में
कलानिधि के कलाकार को सब
जप करते जाने- माने मनु तब
कभी मां की लोरी बन गीतों में
कवि कभी ले लेवे कविता में
अमृत बन अम्बर से बरसे
शरद में बने खीर पर टपके
विधु विनोद अति मनभावन
राकेश रजनी संग बनी सुहागन
रवि - रश्मि संग नज़र चुरावे
प्रियतम बन सारी रात जगावे
सपने शशि के टूट ही जावेे
निशाचर नियति जो इसे बनावे।
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