ग्राम -बुलाँकी
जिला- रायगढ़( छत्तीसगढ़ )
विधा-कविता
शीर्षक -"जनम जनम की प्यासी"
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*जनम जनम की प्यासी*
मैं जनम जनम की प्यासी हूंँ,
मैं प्यासी प्यास बुझाने आई हूंँ।
मेरी प्यास कहीं,कहीं बुझ जाए,
मैं दर दर दरिया ढूंढने आई हूंँ।
दरिया दरिया तो मुझे मिली है,
लेकिन पी नहीं पा रही हूंँ
मदहोश इस दुनियाँ , दुनियाँ में
मैं खुद का होश ,होश गवाई हूंँ।
यह कैसे रिश्ते ,रिश्ते नाते हैं,
यह कैसी भ्रमित संसार है ।
कहीं भी नजरें उठा कर देखो,
मनोरंजन, रंजन का संसार है।
मैं मझधार में फँसी फँसी हूंँ,
मुझे अब किनारा ढूंढना है ।
मेरी नैया कहीं ना खो जाए ,
मुझे अब सहारा ,सहारा ढूंढना है।
मेरी लक्ष्य मुझे ,मुझे पता है ,
मेरी लक्ष्य को मुझे पाना है ।
औरों को भी लक्ष्य मिल जाए,
मुझे ऐसा मन ,मन बनाना है।
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उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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