Saturday, October 3, 2020

मीरा आर्ची चौहान की रचना- बेटी

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-बेटी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अलंकार-एकावली अलंकार

सूरज -सी रुह,रुह  है सूरज -सी|
चांद का टुकड़ा,टुकड़ा चांद का|
 
प्यार की मूरत ,मूरत है प्यार की,
फूल -सी कोमल,कोमल फूल- सी

तितली -सी सुंदर,सुंदर तितली सी
चिड़ियाँ होती है आंगन की बेटियाँ

प्यारी बिटिया चिड़ियाँ आंगन की,
दो कुलों की लाज  होती है बेटियाँ

जन्नत हो जाये आंगन  भी जिनसे 
ऐसी  नायाब नूर होती हैं बेटियाँ||

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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