जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-शीतलता
विधा-कविता (मुक्त छंद)
शीतलता शरद ऋतु के
शीतल बयार की,
मन को,नेत्रों को देती,
अद्भुत ताजगी ।
ज्यों मिल गया हो झुलसे
मन को नई खुशी,
तन को किसी वृक्ष की
ठंडी शीतल छांह।
हे ईश! संपूर्ण ब्रह्मांड में
शीतल बयार दे,
आपदाओं का कहर मिटा,
शांति का उपहार दे।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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