Monday, October 12, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- नारी

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " नारी "
----------------------------------

नारी से ही जन्म लेती 
नारी मैं कहलाती हूँ। 
सबके खुशियों में साथ देती, 
दुःख में अबला बन जाती हूँ।। 

रामायण की सीता मैं, 
वन में हरण हो जाती हूँ। 
सतीत्व की प्रमाण देने, 
अग्नि परीक्षा भी दे जाती हूँ।।

प्रजाधर्म में फिर से मैं,
वन को भेजी जाती हूँ। 
चरित्र में फिर भी दाग लगता, 
धरती में समा जाती हूँ।। 

महाभारत की द्वौपदी मैं ही, 
जुआ में हार जाती हूँ। 
चीर हरण होता भरी सभा में, 
बेसहारा मैं हो जाती हूँ।। 

कलयुग की ओ नारी मैं भी,
घर-घर जलायी जाती हूँ। 
दहेज प्रथा की शिकार होती, 
कभी जिंदा दफनायी जाती हूँ।। 

हवस का शिकार होती, 
चीख-चीख गुहार लगाती हूँ। 
जन्म लेने से पहले मर जाती, 
हरदम मैं ही क्यों दुःख पाती हूँ।। 

पुरुष प्रधान समाज में, 
सम्मान कहाँ मैं पाती हूँ। 
फिर भी घर-घर लक्ष्मी जैसे, 
क्यों मैं पूजी जाती हूँ।।
                                                                              
--------****----------

मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

2 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...