विषय _मुक्त
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ .ग.
शीर्षक -जाने वो कैसा है |
जाने वो कैसा है सोचती हूँ ऐसा है नहीं वैसा है |
जाने वो कैसा है कभी रुला देता है कभी हँसा देता है |
कभी लगता पेपरवाहा है कभी लगता जिम्मेदार है |
कभी बातो मे उलझाता है कभी प्यार से समझाता है |
जाने वो कैसा है सोचती हूँ ऐसा है नहीं वैसा है |
कभी जान लुटाता है कभी जान निकाल लेता है |
प्यार बहुत जताता है मुझे बहुत सताता m है
इतना तो है दिल का साफ है |
तभी उसकी सारी खाताये माफ़ है |
मुझे लगता वो अपना सा है
जैसा भी है मेरा दिल मे बसता है
जाने वो कैसा है सोचती हूँ ऐसा है नहीं वैसा है |
कभी बात मान लेता है तो कभी दिल तोड़ देता है |
कभी प्यार इतना की यकीन नहीं होता |
कभी बेरुखी इतनी की जीना मुश्किल |
समझ नहीं आता उसका प्यार कैसा है |
जाने वो कैसा है सोचती हूँ ऐसा है नहीं वैसा है |
जैसा भी है अपना है बस लगता है अपने जैसा है |
दिल मे बाते छुपाता है पर अपना है ये एहसास करवाता है |
हाँ वो अपने जैसा है मुझे वो समझता है |
थोड़ा मासूम है थोड़ा -थोड़ा सा चंचल है |
जाने वो कैसा है सोचती हूँ ऐसा है नहीं वैसा है |
रचनाकार _ सावित्री यादव " सावि "
बिलासपुर छ.ग.
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