राज्य : छत्तीसगढ़
जिला: जांजगीर चम्पा
विधा: छत्तीसगढ़ी
शायद तोर तक आज, मोर अवाज नइ जावे !
तोला देखे के पहिली, मोला कछु याद नइ आवय !!
हर बेरा बस तोला याद करथव, त मोला तोर चेहरा दिख जाथे !
कइसे कहंव वो तोला मैं आज', तोला मोर सूरता नइ आवय !!
सुक्खा मिर्चा अउ नून, संग म चिरपोटी पताल !
लहसुन बिना' चटनी म, कोनों स्वाद नइ आवय !!
तोर पहली अम्मट के साग, अउ वो हल्दी के दार !
वो मछरी साग के सुरता, आज भी मोर मुह म हावय !!
वो तोर चीला के रोटी, अउ तोर लाली सलवार !
मोर बिना खावत नई रहे, कइसे कहव वो सूरता नई आवय !!
हा तोर ले पहली ये जन्म म, कोनो नई आए रिहिस !
मगर किरिया हे तोर, अब कोनो तोर बाद नइ आवय !!
तोर मया ल याद कर, गुज़ार देहू मोर ये जनम ला !
पर कइसे कहव आज तोला मोर सुरता नई आवय !!
-रुपेश देवांगन,
अकलतरा, (जांजगीर-चम्पा)
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