राज्य: छत्तीसगढ़
जिला: रायगढ़
विधा: गीत
विधान: 16+16=32 मात्रा प्रति चरण
चरणान्त SS
नदी ताल की कल-कल सुनकर,
मन मेरा मोहित हो जाता।
सुगंधित सुखद सुमन देखकर,
मन मेरा हर्षित हो जाता।।
उड़ते पक्षियाँ कलरव करते,
जग को मूक संदेश देते।
अद्भुत अतुलित प्रकृति देखकर,
मन मेरा मोहित हो जाता।।1।।
पर्वतों की गोद में देखो,
भास्कर कैसे मुस्काता है।
लेकर भानु का प्रकाश पुंज,
सारा जग ही खिल जाता है।।
धरती की सुंदरता देखो,
मन मेरा उनमें खो जाता।
अद्भुत अतुलित प्रकृति देखकर,
मन मेरा मोहित हो जाता।।2।।
कल-कल करती नदियाँ बहती,
उड़ते पंछी गीत सुनाती।
पशु-पक्षियाँ आनंद मनाते,
मधुरिम हो फिर धरती गाती।।
अति रमणीया दृश्य देखकर,
हिय मेरा हर्षित हो जाता।
अद्भुत अतुलित प्रकृति देखकर,
मन मेरा मोहित हो जाता।।3।।
स्वरचित मौलिक रचना
-इन्दु साहू,
रायगढ़ छत्तीसगढ़
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