रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर,( छ. ग.)
विषय- माँ,
माँ
मेरा जीवन,मेरा तन,मन,
धन,मेरा सम्मान है,
मेरे खून-खून के कतरा-कतरा
पर एहसान है तेरा माँ।
मेरी साँसों का सरगम,
मेरी ताकत मेरी ऊर्जा,
आन-बान,शान और
पहचान में रूप केवल तेरा माँ।
पग-पग चलना सिखाया,गीले
में स्वंय रह सूखे में सुलाया।
मेरी इज्जत,मेरी शोहरत,
सब में दम है तेरा माँ।
निस्वार्थ प्रेम का अनुपम,
अप्रतिम उदाहरण हो तुम,
जीवन के हर उपलब्धियों पर
नाम लिखा है तेरा माँ।
माँ की लोरी,हाथों का स्पन्दन,
वो तेरा आँचल में ढँकना,
कितना दर्द सहकर पाला,
ये उपकार है तेरा माँ।
मेरा सुख,मेरी कामयाबी,
तेरे आशिर्वाद का प्रतिफल है,
मेरे रोम-रोम में एहसानों
का एहसास छुपा तेरा माँ।
अधर मौन हो जाए,
ख़ामोश नजरों से पहचानती,
सारे रिश्ते-नाते झूठे,एक
निःस्वार्थ प्यार जग में है तेरा मां।
तेरी दुआओं में वो ताकत,
सोए भाग्य जगा दे,
दुःख-दर्द भरी दुनियाँ में
सकून भरा उजियारा तेरा माँ।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में मानव जीवन में माँ के महत्व की चर्चा की गई है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
Friday, October 16, 2020
कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- माँ
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