रचनाकार - संतराम कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - " माँ "
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मांँ के लिए क्या लिखूं मैं,
माँ की ही तो लिखावट हूंँ मैं।
माँ मेरी सारी दुनिया,
माँ की सारी मुस्कुराहट हूंँ मैं।।
माँ मेरी पहचान है,
तू ही तो मेरी जान है।
आशीर्वाद की कभी कमी न हो,
माँ को मेरा कोटि- कोटि प्रणाम हैं।।
जिंदगी तुझसे शुरु हुई,
खत्म भी तुझ पर हो।
सेवा का मुझे इतना अवसर मिले,
कि कर्ज ना कोई मुझ पर हो।।
फिर भी हजारों बूढ़ी माताएँ,
वृध्दाश्रम में देखी जाती है।
जिसने हमको जन्म दिया,
उसी को बेसहारा छोड़ आती है।।
हे पुत्र! क्या तुझे तनीक भी दया नहीं आती है।
लोगों से मेरी एक प्रार्थना है,
करते जो माँ की आराधना हैं।
कभी न आने देना माँ की आँखों में आँसू,
होगी पूरी तुम्हारी हर मनोकामना है।।
माँ के चरणों में जन्नत बसती,
भगवान का दूसरा अवतार है।
मेरे हर श्वास पर मेरी माँ का,
त्याग बलिदान और अश्रु का धार है।।
ममता की, माँ तू खान है।
हर समस्या की तू समाधान है।
दिल का हर दर्द छुपाती,
कर देती जान भी कुर्बान है।।
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मौलिक रचना (स्वरचित)
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Friday, October 16, 2020
संतराम कुम्हार की रचना- माँ
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