Friday, October 16, 2020

रायगढ़ से डिग्री लाल जगत निर्भीक की रचना- माँ शारदे

रचनाकार का नाम- डिग्री लाल जगत निर्भीक
स्थान-खरसिया
विधा-कविता
शीर्षक-कैसे करें पुकार बताओ मां शारदे


,,कैसे करें पुकार बताओ मां शारदे,,
हाथों में कलम ज़िन्दगी अर्पण किये हुये।
हम जी रहे हैं बेबसी में होंठ सीये हुये।।
कैसे करें पुकार बताओ मां शारदे।
पाबन्दी है जुबान पर कांटे चुभे हुये।।
तेरे होकर रो रहे टकरा के टूट रहे।
तुम अब भी हंस रही हो मां वीणा लिये हुये।।
तेरी कला की अब तो मां मर्यादा खत्म है।
वरदान फीके पड़ रहे तेरे दिये हुये।।
कलम को तूने शक्ति दी तलवार के आगे।
रख दो कलम ओ कहते हैं खंजर लिये हुये।।
पी -पी कर अमृत आज ओ बेहोश मर रहे।
फिर भी जी रहे हैं हम जहर पीये हुये।।
उनकी बात सुन लो मां अब छोड़ो कमलासन।
ओ तेरे सामने खड़े कुर्सी लिये हुये।।
मर्यादा सब कुछ बेच कर जीये  तो किस तरह।
मौत की यातना  सह रहे हैं हम जीये हुये।।
अवसान जिंदगी का तमाशा तो देखो मां।
आंसू से आंख गीले हैं चेहरे छुये हुये।।
जुल्मों सितम का दायरा बढ़ता है रोज यहां।
स्वर्  निकालो वीणा के कुछ तो चुने हुये।।


डिग्री लाल जगत निर्भीक
साहित्य साधना सभा छत्तीसगढ़


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