जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - युवा मस्ताने
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// युवा मस्ताने //
देश-धर्म की लाज बचाने ।
कमर कसो युवा मस्ताने ।।
तुम भारत के लाल हो ।
जलती हुई मशाल हो ।।
ऋषि-मुनियों की हो संतान ।
राष्ट्र के प्रहरी जवान ।।
वीर सपूतों ! सीना तानो ।
अपने को नरकेसरी जानो ।।
फौलादी बाहों का बल ।
कर सकती है उथल-पुथल ।।
पौरुष को तुम जीवंत प्रतिमा ।
ओज तेज की कोई न सीमा ।
लाओ रक्त में गरम उबाल ।
तुम अवतारी महाकाल ।।
रखो हौसला बुलंद प्यारे ।
उद्यम - साहस के ही सहारे ।।
खा-पीकर के मौज उड़ाना ।
यह विचार हर्गिज नहीं लाना ।।
उच्चादर्शों पर ही चलना ।
तुच्छ विकारों में मत पड़ना ।।
संयम सदाचार अपनाओ ।
मानवता की शान बढ़ाओ ।।
त्याग शील का पाठ पढ़ो ।
निर्भय होकर आगे बढ़ो ।।
खूब करो सेवा - सत्कर्म ।
यही सफल जीवन का मर्म ।।
उत्तम चरित्र ही पूँजी है ।
महान बनने की कुंजी है ।।
बनकर मीरा ध्रुव प्रह्लाद ।
करो ईश्वर से संवाद ।।
सत्य सनातन धर्म न छोड़ो ।
इसी राह पर सबको मोड़ो ।।
प्रचण्ड आत्मविश्वास जगाओ ।
नौजवान कुछ करो-दिखाओ ।।
देख रो रही भारत माता ।
भूल गए क्या उनसे नाता ??
आयातित पाश्चात्य 'कल्चर' ।
निगल रही है सुरसा बनकर ।।
भोगवाद की काली छाया ।
सबको अपने जाल फँसाया ।।
निष्फल कर दो उनकी चाल ।
जागो , उठो हिन्द के लाल ।।
तन मन धन कुर्बान करो ।
देश के लिए जिओ मरो ।।
जय जवान की गूँजे नारा ।
प्यारा हिंदुस्तान हमारा ।।
भारत का हो शंखनाद ।
सारी दुनिया मे फिर आज ।।
स्वर्ण -चिरैया चहक उठे ।
दुल्हन - सी धरती सजे ।।
बहे सतत दूध की नदियाँ ।
चले राष्ट्र-प्रगति की नैया ।।
प्राचीन वैभव पुनः मिले ।
सर्वोदय का पुष्प खिले ।।
अमर रहे भारत की शान ।
विश्वगुरु का पद सम्मान ।।
दुनिया का सिरमौर कहाये ।
बन गुलाब महके मुस्काये ।।
राम राज्य की हो सरकार ।
यह तो जन्म सिद्ध अधिकार ।।
सच्चे अर्थों मे आजादी ।
तभी मिलेगा मेरे साथी ।।
बोलो जय हिंद वंदेमातरम ।
तरुण आपका स्वागतम् ।।
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