जिला एवं राज्य:-रायबरेली, उत्तर प्रदेश
शीर्षक:-समाज का कड़वा सच
विधा:-कविता
सच की थाली में सजा धजा
यहाँ झूठ परोसा जाता है
दिन प्रतिदिन और जगह जगह
यहाँ सच को कुचला जाता है
यहाँ साख बढ़ाने की खातिर
अपनों की बली चढ़ाते हैं
जिनके कारण चलना सीखा
उनको ही नाच नचाते हैं
गैरों के दिल में जगह बने
सो अपनों को झोंका जाता है
सच की थाली में सजा धजा
यहाँ झूठ परोसा जाता है
जिनके कारण सम्मान मिला
जीवन जीने का ज्ञान मिला
जिनके मार्ग प्रदर्शन से
सम्मानजनक स्थान मिला
आगे बढ़ने की चाहत में
उनको भी मिटाया जाता है
सच की थाली में सजा धजा
यहाँ झूठ परोसा जाता है
दिन प्रतिदिन और जगह जगह
यहाँ सच को कुचला जाता है।
Shandar
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