Wednesday, October 21, 2020

कांकेर से पवन कुमार सेन "पव्वा" की रचना- शक्सियत

रचनाकार - पवन कुमार सेन "पव्वा"
स्थान/राज्य - कांकेर, छत्तीसगढ़
विधा - छंद मुक्त
शीर्षक - शक्सियत

अपने पे इतना गुमां
ना कर गालिब
वजुद
तेरा भी है ।
मेरा भी है ।।

जमीं पर खड़ा
आसमां में पैर
तेरा भी है ।
मेरा भी है ।।

बराबरी पे है
वक़्त हमारा
शक्सियते भारी है
सब पर
इतनी तो औकात
तेरी भी है ।
मेरी भी है ।।

ना तौल
एक दुसरे को
चौराहे पर खड़ा होकर
रह जायेगी
जो बात
तेरी भी है ।
मेरी भी है ।।

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