स्थान/राज्य - कांकेर, छत्तीसगढ़
विधा - छंद मुक्त
शीर्षक - शक्सियत
अपने पे इतना गुमां
ना कर गालिब
वजुद
तेरा भी है ।
मेरा भी है ।।
जमीं पर खड़ा
आसमां में पैर
तेरा भी है ।
मेरा भी है ।।
बराबरी पे है
वक़्त हमारा
शक्सियते भारी है
सब पर
इतनी तो औकात
तेरी भी है ।
मेरी भी है ।।
ना तौल
एक दुसरे को
चौराहे पर खड़ा होकर
रह जायेगी
जो बात
तेरी भी है ।
मेरी भी है ।।
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