नाम - पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला-- महासमुंद
राज्य - छत्तीसगढ़
विधा - गीत
विषय- "पहुना"
पहुना माता तँय बन आजा ,
सब घर अँगना दुवारी ।
जम्मो झन ला दरसन दे दे,
जगत जननी महतारी ।।
लिपय-पोतय घर अँगना,
बारय दियना बाती ।
पीढ़वा कलश सजावय मईया ,
जगमग आगे नवराती ।।
आमा डार के मड़ुआ छवाये ,
महकत सुघ्घर फुलवारी ।
पहुना माता तँय बन आजा,
सब घर अँगना दुवारी ...
तोरन , लरि लहरावय माता ,
घर - घर चंउक पुरावय।
धजा, नारियर ,पान- सुपारी ,
आसन म तोर चढ़हावय।।
पहिली दिन तोर रूप कुमारी ,
तँय परवत राज दुलारी।
पहुना माता तँय बन आजा ,
सब घर अँगना दुवारी .....
पिछु होगे अक्कल जगत म,
लबारी के भरय झोली ।
दया , धरम के रद्दा छूट गे ,
ईमान खुसर गे खोली।।
दूसर दिन ब्रम्हचारणी माई ,
धर आबे अक्कल भारी।
पहुना माता तँय बन आजा,
सब घर अँगना दुवारी ....
सृष्टि के जम्मो रूप बिगड़ गे ,
परदूषण छाये भारी ।
हवा में जाहर भरय मईया ,
रुखवा दिखय कारी।
हे !चन्द्रघण्टा मईया ,
सजाओ जग रूप न्यारी।
पहुना माता तँय बन आजा,
सब घर अँगना दुवारी....
त्राहि - त्राहि मचे जगत ,
विपदा छाय हे घनघोर ।
लुटावय नारी के सम्मान,
जग बने दानव अघोर।।
सप्तम कालरात्रि कहाये,
कर दे माँ जग उजियारी।
पहुना माता तँय बन आजा ,
सब घर अँगना दुवारी ....
नौ दिन म नौ रूप धरय माँ,
चमकय आठो अंग।
मुख मधुर मुस्कान भरय ,
मुस्काय दुनिया संग ।।
नौ रूप समाये दुर्गा कहाये,
करय माता शेर सवारी।
पहुना माता तँय बन आजा ,
सब घर अँगना दुवारी ....
पुष्पा ग़जपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)
Monday, October 19, 2020
महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- पहुना
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