Monday, October 19, 2020

महासमुन्द से पुष्पा गजपाल "पीहू" की रचना- पहुना

नाम - पुष्पा गजपाल "पीहू"
जिला-- महासमुंद
राज्य  - छत्तीसगढ़
विधा  - गीत
विषय- "पहुना"

पहुना माता तँय बन आजा ,
                 सब घर अँगना दुवारी ।
जम्मो झन ला दरसन दे दे,
                जगत जननी महतारी ।।

लिपय-पोतय घर  अँगना,
         बारय  दियना  बाती ।
पीढ़वा कलश सजावय  मईया  ,
         जगमग आगे नवराती ।।
आमा डार के मड़ुआ छवाये  ,
         महकत सुघ्घर फुलवारी ।
पहुना माता तँय बन आजा,
         सब घर अँगना दुवारी ...

तोरन , लरि लहरावय माता ,
          घर - घर चंउक पुरावय।
धजा, नारियर ,पान- सुपारी ,
          आसन म तोर  चढ़हावय।।
पहिली दिन तोर रूप कुमारी ,
           तँय परवत राज दुलारी।
पहुना  माता तँय बन आजा ,
           सब घर अँगना दुवारी .....

पिछु होगे अक्कल जगत म,
           लबारी के भरय झोली ।
दया , धरम के रद्दा  छूट गे   , 
         ईमान  खुसर गे खोली।।
दूसर दिन ब्रम्हचारणी माई ,
           धर आबे  अक्कल भारी।
पहुना माता तँय बन आजा,
           सब घर अँगना दुवारी  ....

सृष्टि के जम्मो रूप बिगड़ गे ,
            परदूषण  छाये भारी ।
हवा में जाहर भरय मईया ,
             रुखवा  दिखय कारी।
हे !चन्द्रघण्टा मईया ,
         सजाओ जग रूप न्यारी।
पहुना माता  तँय बन आजा,
          सब  घर अँगना  दुवारी....

त्राहि - त्राहि मचे जगत ,
        विपदा  छाय हे घनघोर ।
लुटावय नारी के सम्मान,
         जग बने दानव अघोर।।
सप्तम  कालरात्रि कहाये,
          कर दे माँ जग उजियारी।
पहुना माता तँय बन आजा ,
          सब घर अँगना दुवारी ....

नौ दिन म नौ रूप धरय माँ,
            चमकय  आठो  अंग।
मुख मधुर मुस्कान भरय , 
           मुस्काय  दुनिया   संग ।।
नौ रूप समाये दुर्गा कहाये,
            करय  माता शेर सवारी।
पहुना माता तँय बन आजा ,
           सब घर अँगना दुवारी ....

पुष्पा ग़जपाल "पीहू"
महासमुंद(छ. ग.)


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