Monday, October 26, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान की रचना- महक

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता-मुक्त
विषय---महक
शीर्षक---महकते शब्द साहित्य के

महकते शब्द साहित्य के ,जो जीवन से जुड़े होते हैं ।
सुख दुखों के बीजों से, पेड़ों की तरह खड़े होते हैं ।

पुष्पों की तरह भले सूक्ष्म हो,
माला है बन जाते ।
खुद को मिटाकर वे,
दुसरों का जीवन सजाते ।
ऐसे ही सज्जन पुरुष, यहां वहां लोगों से दूर पड़े होते हैं ।

शब्द साहित्य का आधार,
कठोर भी कोमल भी उनका प्रकार ।
युगों-युगों तक जिनके होते ।
मन में  विपुल भण्डार ।
उनके अग्र कोई कलम उपासक  कभी  न बड़े होते हैं ।

जिस शब्द ने आंसू पोछा,
उमड़ते दुखों के धाराओं को रोका ।
जिनसे कई पीढ़ियां करती है नाज ।
उससे भविष्य को नहीं धोखा ।
बनाते अमर जीवन को   सदा ,गहरे उनके सारे जड़े होते हैं ।

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