स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता-मुक्त
विषय---महक
शीर्षक---महकते शब्द साहित्य के
महकते शब्द साहित्य के ,जो जीवन से जुड़े होते हैं ।
सुख दुखों के बीजों से, पेड़ों की तरह खड़े होते हैं ।
पुष्पों की तरह भले सूक्ष्म हो,
माला है बन जाते ।
खुद को मिटाकर वे,
दुसरों का जीवन सजाते ।
ऐसे ही सज्जन पुरुष, यहां वहां लोगों से दूर पड़े होते हैं ।
शब्द साहित्य का आधार,
कठोर भी कोमल भी उनका प्रकार ।
युगों-युगों तक जिनके होते ।
मन में विपुल भण्डार ।
उनके अग्र कोई कलम उपासक कभी न बड़े होते हैं ।
जिस शब्द ने आंसू पोछा,
उमड़ते दुखों के धाराओं को रोका ।
जिनसे कई पीढ़ियां करती है नाज ।
उससे भविष्य को नहीं धोखा ।
बनाते अमर जीवन को सदा ,गहरे उनके सारे जड़े होते हैं ।
No comments:
Post a Comment