Monday, October 26, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- महक

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - महक
विधा - मुक्त
शीर्षक - जीवन की महक
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        //  जीवन की महक  //

गुरुदेव ने कहा
अपने शिष्यों से -
गुलाब का एक फूल लो 
और चले जाओ
किराने की दुकान पर ।
गुड़ , शक्कर ,चावल , दाल ,
घी , तेल व मसाले जैसे 
अनेक वस्तुओं के पास
उस फूल को 
रखते जाओ क्रमशः 
तो खुशबू किसकी आएगी ?
शिष्यों ने कहा -
गुलाब की ही सुगंध आएगी
गुरुदेव !
तब पुनः गुरुजी बोले -
अच्छा , अब इस फूल को 
घर में , खेत मे , 
जंगल मे , बाजार मे
या कोई
गंदी जगह ले जाकर सूँघो
तो खुशबू किसकी होगी ?
सभी शिष्य
एक साथ बोल उठे -
खुशबू तो केवल गुलाब की ही आएगी ,
गुरुदेव !!
गुरुदेव पसन्न हो गए -
शाबाश , मेरे बच्चों !
तुम सब इसी तरह 
गुलाब होकर महको ,
तुम्हें जमाना जाने....
अपने ज्ञान , भक्ति , प्रेम
एवं सदाचार से 
दुनिया को
प्रकाशित करना है ।
किन्तु बचना है 
किसी के
अवांछनीय प्रभाव व संग से
अर्थात्
सर्वत्र फैलाना है
अपने जीवन की महक ।

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