जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " आज फिर से तेरी याद आई है "
विधा - छंदमुक्त कविता
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आज फिर से तेरी याद आई है।
ये दिल न जाने किससे मिल आई है।
दफन कर दी थी हर खयालात तुम्हारी,
कब्र से उठ न जाने,फिर क्यों चली आई है।।
भूल गया हर मुलाक़ात तुम्हारी,
कसमें वादे वफाएं सारी।
भीड़ में भी अब सिर्फ तन्हाई है।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
पल-पल तरसा तेरे दीदार को,
महसूस किया तेरे उस प्यार को।
अब साथ सिर्फ मेरी परछाई है।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
लम्हें जो हसीन गुजारे थे साथ,
हमदम बनाकर थामा था हाथ।
आँखों में अक्श मेरी भर आई है।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
ख्वाबों में आकर क्यों अब मुझे सताते हो,
दूर होकर भी अपने होने का एहसास कराते हो।
चुड़ी की खनखन देती मुझे सुनायी है।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
दो जिस्म एक जान थे,
साथ जीने-मरने के अरमान थे।
सूरत दिल में नजर तेरी आई है ।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
मायूस न होना तुम कभी,
मैं हर पल तुम्हारे पास हूँ।
खुश नहीं तुम भी मेरे बिन,
मैं भी तो जिंदा लाश हूँ।
तोते ने उड़कर खत तुम्हारी लायी है।
आज फिर से तेरी याद आई है।।
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मौलिक रचना (स्वरचित)
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Bahut sunder
ReplyDeleteThank-you so mitra
DeleteBhut khoob
ReplyDeleteThank-you
Deleteबहुत ही अच्छा है भाई
ReplyDeleteधन्यवाद भैया
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