रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- नवरात्र
शीर्षक :- अंधभक्ति
विधा :- लघुकथा
#######################
एक बूढ़ी दादी चलते चलते अचानक एक दुर्गा पण्डाल में ठिठक गई। वह हफ्तों से भूखी थी, चपटे हुए गाल व हाड़ मांस की काया करुण रूदन कर उसकी दयनीय स्थिति को प्रकट कर रही थी। उसने पास ही खड़ी एक महिला से खाने को मांगा, क्योंकि उसकी वेशभूषा व आभूषणों से यह प्रतीत हो रहा था कि वह बहुत ही धनी है।
उस धनी महिला ने बड़ी ही असभ्य व्यवहार के साथ उसे दुत्कार कर भगा दिया। वह अपना सा मुंह लेकर वहां से लौट गई, रास्ते में एक कुटिया में उसे भर पेट भोजन मिल गया, साथ ही मिल गया एक यक्ष प्रश्न जिसका जवाब शायद ही कोई दे पाएगा। कि आखिर क्यों कोई व्यक्ति हजारों - लाखों रुपए माता की भक्ति में खर्च कर सकता है, लेकिन दीन - दुखियों की सेवा में एक कौड़ी भी देना नहीं चाहता। यह देव भक्ति नहीं मात्र अंधभक्ति है जो दिखावे के गहनों से सुसज्जित है।
#######################
Saturday, October 17, 2020
महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की लघुकथा- अंधभक्ति
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
No comments:
Post a Comment