जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-भाव- पुष्प|
विधा-कविता (मुक्त छंद)
भावना के भाव भरकर,
कर रही हूँ मैं प्रार्थना|
मन के भावों से सजी है
माँ मेरी ये आराधना|
हे माँ भवानी! जगदम्बे!
उर में सबके नेह भर|
जो आहत हैं पीड़ा से
उनमें माँ सौहार्द भर||
तरु-छाया -सी भक्ति दे,
मन को आलोकित कर|
तम से आप्लावित वीथिका,
ज्ञान से माँ ज्योतित कर||
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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