जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - भावना
विधा - मुक्त
शीर्षक - मन के भाव
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// मन के भाव //
मन मे आते अनेक भाव ।
अच्छे - बुरे दोनो ही भाव ।।
अपनाना है सत्य शुभ भाव ।
छोड़ो अशुभ निरर्थक भाव ।।
जीवन को सँवारे सुंदर भाव ।
जीवन को बिगाड़े गन्दे भाव ।।
हटाओ नफरत निंदा का भाव ।
झूठ कपट छल वाले भाव ।।
दुष्ट राक्षसी मोहिनी भाव ।
सर्वविनाशक तामसी भाव ।।
दुर्जन हेतु उपेक्षा का भाव ।
नहीं घृणा अपमान का भाव ।।
त्याग प्रेम करुणा का भाव ।
धारण करो ये मानवी भाव ।।
रखो सबके हित का भाव ।
मंगल मधुर मनोहर भाव ।।
स्वागत और सम्मान का भाव ।
सबसे उदार मैत्री का भाव ।।
आनंदप्रद हितकारिणी भाव ।
सुख - संतोष का रखो भाव ।।
देश भक्ति का गर्वित भाव ।
सत्यनिष्ठता का हो भाव ।।
आज यही प्रासंगिक भाव ।
जन - जन में जागृत हो भाव ।।
आस्था और संस्कारित भाव ।
श्रद्धा का हो उत्कट भाव ।।
केवल सात्विक निर्मल भाव ।
जो है सर्वहितैषी भाव ।।
यही परम कल्याणी भाव ।
जीवन को महकाते भाव ।।
नीति धर्म औऱ न्याय का भाव ।
संत शास्त्र अनुमोदित भाव ।।
ज्ञानमयी बैरागी भाव ।
प्रभु - प्रीति का हो निज भाव ।।
ध्यान भजन सत्संग का भाव ।
जप - सुमिरन का दुर्लभ भाव ।।
अहं ब्रम्हास्मि का वैदिक भाव ।
आत्मबोध का प्रत्यक्ष भाव ।।
प्रेमाभक्ति का उज्ज्वल भाव ।
भव से पार उतारे भाव ।।
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