Tuesday, October 20, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- मन के भाव

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - भावना
विधा - मुक्त
शीर्षक - मन के भाव
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     // मन के भाव //

मन  मे आते  अनेक   भाव ।
अच्छे - बुरे  दोनो  ही भाव ।।
अपनाना है  सत्य शुभ भाव ।
छोड़ो अशुभ निरर्थक भाव ।।
जीवन को सँवारे  सुंदर भाव ।
जीवन को बिगाड़े गन्दे भाव ।।
हटाओ नफरत निंदा का भाव ।
झूठ कपट  छल वाले   भाव ।।
दुष्ट  राक्षसी    मोहिनी  भाव ।
सर्वविनाशक  तामसी भाव ।।
दुर्जन  हेतु  उपेक्षा का भाव ।
नहीं घृणा अपमान का भाव ।।
त्याग  प्रेम करुणा  का  भाव ।
धारण  करो  ये मानवी भाव ।।
रखो   सबके  हित  का  भाव ।
मंगल  मधुर   मनोहर   भाव ।।
स्वागत और सम्मान का भाव ।
सबसे  उदार  मैत्री  का भाव ।।
आनंदप्रद   हितकारिणी भाव ।
सुख - संतोष  का  रखो भाव ।।
देश  भक्ति  का  गर्वित   भाव ।
सत्यनिष्ठता   का   हो   भाव ।।
आज   यही   प्रासंगिक  भाव ।
जन - जन में जागृत हो भाव ।।
आस्था और   संस्कारित भाव ।
श्रद्धा   का  हो  उत्कट   भाव ।।
केवल सात्विक   निर्मल  भाव ।
जो   है    सर्वहितैषी      भाव ।।
यही   परम   कल्याणी    भाव ।
जीवन   को   महकाते   भाव ।।
नीति  धर्म औऱ न्याय का भाव ।
संत शास्त्र   अनुमोदित  भाव ।।
ज्ञानमयी      बैरागी        भाव ।
प्रभु - प्रीति का हो निज भाव ।।
ध्यान भजन  सत्संग  का भाव ।
जप - सुमिरन का दुर्लभ भाव ।।
अहं ब्रम्हास्मि का वैदिक भाव ।
आत्मबोध  का  प्रत्यक्ष  भाव ।।
प्रेमाभक्ति का  उज्ज्वल   भाव ।
भव  से   पार    उतारे   भाव ।।

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