Tuesday, October 20, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- मेरी भावना

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - छंदमुक्त कविता 
   शीर्षक - " मेरी भावना "
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ठेस न पहुँचे किसी के दिल को, 
करुँ ऐसा मैं व्यवहार। 
बड़ों का मैं आदर करूँ,
मिले छोटों को मुझसे प्यार।। 
            ऐसी है मेरी भावना। 
            सबके लिए हो सद्भावना।। 

मन में अहम का ना भाव हो। 
ईर्ष्या-द्वैष का न मन में स्वभाव हो। 
लोभ न करुँ दूसरों के धन में, 
मेरे कारण किसी को न कोई घाव हो।।
            ऐसी है मेरी भावना। 
            मन की मेरी यही है कामना।। 

सज्जनों का निरंतर सत्संग करुँ। 
माँ के चरणों में सदा ध्यान धरुँ। 
सेवा करुँ पिता की हरदम, 
मुस्कान से भाई का दामन भरुँ।।
            ऐसी है मेरी भावना। 
            स्वर्ग से सुंदर घर सुहावना।। 

नारी का करुँ मैं सदा सम्मान। 
न हो उनकी सपनों का बलिदान। 
बेआबरु न हो कोई भी बेटी, 
न जाये किसी भी बहन की जान।। 
            ऐसी है मेरी भावना। 
            किसी का न हो दरिंदों से सामना।। 

भूखा न कोई अनाथ हो। 
अन्नदेवी सबके साथ हो। 
छत का छाया हो सभी के ऊपर, 
गरीबों से भरा न कोई फूटपाथ हो।। 
            ऐसी है मेरी भावना। 
            जल से,प्यासे की जिंदगी को थामना।। 
        
रोगमुक्त यह सारा संसार हो। 
कोरोना का जल्दी संहार हो। 
खुशियाँ लौटे सभी के जीवन में, 
स्वतंत्र वादियाँ और बहार हो।। 
            ऐसी है मेरी भावना। 
            ईश्वर से करुँ मैं आराधना।। 

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मौलिक रचना (स्वरचित) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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