पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ----- मोह
शीर्षक --- दयानिधि राम हमारे...
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भज ले राम भजन , सुन ओ प्यारे !
सब पीड़ा हर लेंगे , प्रभु राम तुम्हारे !
माया की ये नगरी है पगले ,
आजा शरण में , तज मोह सारे !
हर बिगड़ी काम बनाए ,
दयानिधि राम हमारे !
माता - पिता की कर ले रे सेवा ,
होंगे तेरे वारे - न्यारे !
जीवन की नैया पार लगा दे ,
प्रभु राम है , खेवनहार हमारे !
वो देखें सब को एक नजर से ,
तू भिन्न - भिन्न क्यों बात विचारे !
अजब है प्रभु की महिमा ,
दानव - मानव सब को तारे !
धन-दौलत , रिश्ते - नाते सब माटी है ,
मोह - जाल में तू मत फंस प्यारे !
रामधुन - सागर में लगा ले गोता ,
धुल जाएंगे सबके पाप सारे !
अपने - पराये का मोह छोड़ दें ,
अंत सफ़र में होंगे न कोई साथ तुम्हारे !
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