Tuesday, October 6, 2020

उर्मिला सिदार की रचना- मोह

रचनाकार - उर्मिला सिदार
ग्राम - बुलाकी 
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़ 
विधा - कविता 
शीर्षक - मोह
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                   *मोह*
मोह एक आशक्ति आवेश है,
इस आशक्ति आवेश से दूर रहो। 
आशक्ति जब अति होती है,
तो मानव जिंदगी तबाह की ओर।

तबाह जिंदगी कोई नहीं चाहता,
अज्ञानता वश आशक्ति में फंस जाते हैं।
आशक्ति मोह का परिणाम,
जीवन को झकझोर कर रख देती है।

जड़ -चैतन्य इस संसार में,
मोह की पसरा जंजाल है।
इस मोह से निवृत हो कैसे,
आशक्ति जग की हालात से।

काम, क्रोध, लोभ,मोह,
मात्सर्य,भय, आस्था।
यह सब आशक्ति का तत्व,
न बनती है इससे मानत्व।
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                          उर्मिला सिदार 
                     रायगढ़ छत्तीसगढ़

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