जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मोह
विधा-कविता(मुक्त छंद)
अलंकार-तद्गुण अलंकार
मोह करे सुंदरता का
भटक रहा इंसान रे|
मन की सुंदरता
कैसे भूल गया तू,
खोज रहा संसार में||
नश्वर को तू जानता,
पर मोह छोड़ न पाये,
थोड़े सुख की आस में
मानव सुध -बुध गंवा,
भटक रहा संसार में|
मोह रख उस ईश से,
जो जग के तारणहार|
सबके नाव खिवैया वो,
तेरा बेड़ा पार लगाये,
एक दिन इस संसार से||
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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तद्गुण अलंकार-
1-खोज रहा संसार में|
2-भटक रहा संसार में|
3-सबके नाव खिवैया वो|
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