रचयिता- पुष्पा पटनायक
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"जल प्रपात"
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जलप्रपात से सजा छत्तीसगढ़
चित्रकूट हो या हो तीरथगढ़
इंद्रावती कल -कल बहती
खुद ही रास्ता तय करती
सीना चिरकर पत्थर का
झर-झर गिर निर्झर बन जाती
गिरती नीचे करती हुड़दंग
बिखेर देती इंद्रधनुष के रंग
तटनी के तट खड़े विहंग
फुहारों से भीगते मतंग
रुई सरीखे लगे फुहारे
कभी लगे बादल हों घनेरे
हरीतिमा लिए वन उपवन
मन मोहते जलप्रपात संग
मनोरम छटा सब को भाता
लोगों का तांतां लग जाता
Thursday, October 15, 2020
रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- जलप्रपात
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